छत्तीसगढ़ में श्रम कल्याण का नया दौर, 56 लाख से अधिक श्रमिक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में
रायपुर, छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा और समग्र विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा योजनाबद्ध तरीके से ऐतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं। श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन के निर्देशन में पिछले ढाई वर्षों के दौरान श्रम कानूनों के आधुनिकीकरण, प्रशासनिक ढांचे के विस्तार, डिजिटल पारदर्शिता और सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर व्यापक सुधार किए गए हैं। वर्तमान में प्रदेश के 56.83 लाख से अधिक श्रमिक विभिन्न मंडलों के अंतर्गत पंजीकृत होकर शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ उठा रहे हैं।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- 56.83 लाख पंजीकृत श्रमिक: संगठित, असंगठित और निर्माण क्षेत्र के 56.83 लाख श्रमिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में।
- आवास सहायता में ₹50,000 की बढ़ोतरी: निर्माण श्रमिकों के लिए आवास सहायता ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹1.50 लाख की गई।
- दीदी ई-रिक्शा योजना: महिला श्रमिकों को आत्मनिर्भर बनाने ई-रिक्शा अनुदान राशि बढ़ा कर ₹1.50 लाख की गई।
- ₹173.32 करोड़ का सीधा लाभ: 30 जून 2026 तक 3.48 लाख श्रमिकों को बीमा, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास का सीधा आर्थिक लाभ।
- अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना: श्रमिक वर्ग के 200 प्रतिभावान बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा (सीटें 100 से बढ़ाकर 200 की गईं)।
- ₹5 में पौष्टिक भोजन: ‘शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना’ के तहत 18 जिलों के 39 केंद्रों पर गरम व पौष्टिक भोजन उपलब्ध।
प्रशासनिक विस्तार और 24 घंटे में श्रम पंजीयन
श्रम विभाग की सेवाओं को सुगम और त्वरित बनाने के लिए राज्य में प्रशासनिक ढांचे को मजबूत किया गया है:
- 33 श्रम कार्यालय सक्रिय: 5 नए जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय शुरू किए गए हैं। अब प्रदेश में 10 सहायक श्रमायुक्त कार्यालय एवं 23 श्रम पदाधिकारी कार्यालय संचालित हैं।
- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: ‘छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना नियम, 2021’ में संशोधन कर श्रम पहचान पंजीयन प्रमाण-पत्र 24 घंटे के भीतर जारी करने का प्रावधान लागू किया गया है।
- महिला सुरक्षा व रोजगार: ‘छत्तीसगढ़ कारखाना नियम, 1962’ में संशोधन कर निर्धारित सुरक्षा मानकों के साथ कारखानों में महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोले गए हैं।
शिक्षा व स्वास्थ्य: श्रमिक परिवारों के उज्ज्वल भविष्य का आधार
- मुफ्त प्रतियोगी कोचिंग: ‘अटल कैरियर निर्माण योजना’ के तहत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को मेडिकल और इंजीनियरिंग (JEE/NEET) जैसी प्रवेश परीक्षाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण मुफ्त कोचिंग दी जा रही है।
- स्वास्थ्य परीक्षण: ‘मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य परीक्षण योजना’ के जरिए कार्यस्थलों पर निर्माण श्रमिकों की नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर इलाज की व्यवस्था की जा रही है।
डिजिटल पारदर्शिता और मॉडल लेबर चौक
- ‘ई-श्रम साथी’ मोबाइल ऐप: श्रमिकों और नियोजकों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है, जिससे श्रमिक स्वयं पंजीयन कर सीधे रोजगार के अवसरों से जुड़ रहे हैं।
- मॉडल लेबर चौक फेसिलिटेशन सेंटर: चौराहों पर काम की तलाश में एकत्र होने वाले श्रमिकों के लिए विश्राम, शुद्ध पेयजल, भोजन और ऑन-द-स्पॉट योजना आवेदन की सुविधाओं से युक्त मॉडल सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं।
सामाजिक सुरक्षा और मुआवजा व्यवस्था
राज्य सरकार ने दुर्घटना और आपात स्थिति में श्रमिकों के परिवारों को संबल देने के लिए सहायता राशि का स्पष्ट प्रावधान रखा है:
| स्थिति / दुर्घटना का प्रकार | दी जाने वाली आर्थिक सहायता |
| कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु | ₹5,00,000 |
| स्थायी दिव्यांगता होने पर | ₹2,50,000 |
| सामान्य मृत्यु (आश्रितों हेतु) | ₹1,00,000 |
| अपंजीकृत श्रमिक की कार्यस्थल मृत्यु | ₹1,00,000 |