खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के बाद सामुदायिक पावर हाउस के रूप म जाने जाहीं सिद्दी पहलवान
सिद्दी समुदाय के पहलवान मन जीतिन तीन ठन सोन (स्वर्ण) अउ एक ठन रजत के पदक
रायपुर. ‘प्रतिभा ला कोनो परिचय के जरूरत नइ राहय’- ये बात ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स- 2026’ म सच साबित होइस, जिहां कर्नाटक के ‘सिद्दी समुदाय’ के पहलवान मन ह मैट म अपन जबरदस्त छाप छोड़े हें। उंकर ये सफलता ह अब सिरिफ पदक मन तक सीमित नइ हे, बल्कि ये हा पूरा समुदाय के कुश्ती के क्षेत्र म एक ताकत के रूप म उभरे के प्रतीक आय। अफ़्रीकी मूल के भारत म लगभग 50,000 सिद्दी मनखे रहिथें, जेमा ले एक-तिहाई कर्नाटक म निवास करथें।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 म कर्नाटक के 9 पहलवान मन ह हिस्सा लीन, जेमा ले 4 झन सिद्दी समुदाय के रिहिन। ये चार पहलवान मन मा ले तीन झन ह सोन के पदक अपन नाम करिन अउ एक झन ला रूपे के पदक मिलिस। सोन के पदक जितइया पहलवान मन म मनीषा जुआवा सिद्दी (76 किलो), रोहन एम डोड़ामणि (ग्रीको रोमन 60 किलो) अउ प्रिंसिता पेदरू फर्नांडिस सिद्दी (68 किलो) सामिल हें, जबकि शालिना सेयर सिद्दी (57 किलो) ला रूपे के पदक ले संतोष करे बर पड़िस।
ये पहलवान मन के सफलता न सिरिफ उंकर संघर्ष अउ मिहनत के कहानी ला बताथे, बल्कि कुश्ती जइसन खेल म सिद्दी समुदाय के बाढ़त दबदबा ला घलो देखाथे। कर्नाटक के ये चारो पहलवान मन के दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम म ट्रायल होय रिहिस अउ उहां घलो ये मन पहिली नंबर म रिहिन। सिद्दी समुदाय के प्रदरसन ले कर्नाटक कुश्ती टीम के कोच ममता ह अब्बड़ गरब (गौरव) महसूस करत हे।
ममता ह कहिस, ”जइसे हमर देस म कुश्ती म हरियाणा के दबदबा हे, त ठीक वइसे ही हमर राज म अहलियाल क्षेत्र के कुश्ती म दबदबा रहिथे। राज म डिपार्टमेंट ऑफ यूथ एंड डेवलपमेंट एंड सेंटर मुख्य रूप ले इही सिद्दी समुदाय बर आय। इंकर लइका मन इहें ट्रेनिंग करथें। पिछलू कुछ समय ले ये समुदाय के मनखे मन के अंदर कुश्ती के गजब सउख (क्रेज) बाढ़े हे अउ उमन अब अपन लइका मन ला कुश्ती म भेजे बर धर ले हें। उत्तरी कर्नाटक के धारवाड़ जिला ले अइया पुरुष पहलवान रोहन एम. डोड़ामणि घलो इही समुदाय ले आथें। डोड़ामणि के दाई ह सरकारी इस्कूल म खाना बनाथे अउ ओकर ददा के छह बछर पहिली ही देहांत हो चुके हे।”
रोहन ह कहिस, “सिद्दी समुदाय के अंदर समय-समय म छोटे दंगल होवत रहिथे अउ जेन एमा जितथे, ओला जादा ले जादा इनाम के रासि देके सम्मानित करे जाथे। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 म सोन के पदक जिते ले पहिली मैं ह सीनियर नेशनल चैंपियनशिप, नेशनल गेम्स अउ ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स म घलो भाग ले चुके हंव।”
देस म खिलाड़ी मन के अंदर छुपे प्रतिभा ला पहचाने अउ उमन ला एक बने मंच देय बर भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) अउ खेल मंत्रालय ह मिलके 2018 म खेलो इंडिया यूथ गेम्स के सुरुआत करे रिहिन। ओकर बाद खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स अउ अब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के सुरुआत होय हे।
साई के टैलेंट डेवलपमेंट कमेटी के सदस्य महा सिंह राव ह कहिथे, ”साई अउ खेल मंत्रालय के डहर ले हमन कम उमर के प्रतिभाशाली लइका मन के पहिचान करथन ताकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जेन सपना हे कि 2036 ओलंपिक खेल भारत म होवय, ओ सपना ला साकार करे बर ये ह सरकार के रणनीति के एक हिस्सा आय। प्रधानमंत्री के अलावा खेल मंत्री, साई अउ हमन ये सपना ला साकार करे म लगे हन कि आगे अइया ओलंपिक खेल मन म हमन जादा ले जादा मेडल जीतन।”
उत्तर कन्नड़ कारवार जिला ले अइया शालिना सेयर सिद्दी ह ये प्रतियोगिता म रूपे के पदक जिते के बाद कहिस, ”हमर समुदाय म कुश्ती ला लेके अब मनखे मन रूचि (दिलचस्पी) लेय लगे हें। मैं ह अपन काका के कहे म कुश्ती सुरू करे रेहेंव अउ सुरू ले ही उही मोला ट्रेनिंग देवत आवत हे। मैं ह ये प्रतियोगिता बर मिहनत त पूरा करे रेहेंव, फेर किस्मत ला कुछ अउ ही मंजूर रिहिस अउ मैं ह सोन के पदक जिते ले चूक गेंव।”
कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ कारवार जिला ले ही अइया प्रिंसिता सिद्दी ह कहिस, ”सुरू म मोला कुश्ती म कोनो रूचि नइ रिहिस अउ मैं ह अब्बड़ रोय रेहेंव। फेर धीरे-धीरे जब हमर समुदाय के लइका मन एमा भाग लेय लगिन त उमन ला देखके मैं घलो प्रैक्टिस करे लगेंव। इहां तक पहुंचे बर मैं ह संझा-बिहनिया दू-दू घंटा प्रैक्टिस करथंव। मोला इंटरनेशनल लेवल म मेडल लाना हे अउ एखर बर मैं ह कड़ा मिहनत करत हंव।”
ये पहलवान मन के सफलता ये बात ला सिद्ध करथे कि जब सही मंच, ट्रेनिंग अउ सहयोग (सपोर्ट) मिलथे, त दूरदराज के समुदाय ले घलो प्रतिभा मन सिखर तक पहुंच सकथें अउ भारत के खेल भबिस्य ला आकार दे सकथें।