किराए के दो कमरों से सुविधायुक्त भवन तक, भाटापारा आंगनबाड़ी केंद्र को मिला अपना घर
रायपुर, कभी किराए के मकान के दो छोटे कमरों में संचालित होने वाला सरगुजा जिले के भाटापारा गांव का आंगनबाड़ी केंद्र अब अपने नए और सुविधायुक्त भवन में बच्चों की किलकारियों से गुलजार है। सीमित जगह के कारण जहां पहले बच्चों के बैठने, सीखने और खेल-कूद की गतिविधियों में परेशानी होती थी, वहीं अब रंग-बिरंगे शैक्षणिक चित्रों से सजे भवन में नौनिहाल खेल-खेल में सीख रहे हैं। पर्याप्त जगह मिलने से पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और अन्य गतिविधियों का संचालन भी बेहतर तरीके से हो रहा है।
विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत अंबिकापुर विकासखंड की ग्राम पंचायत चठिरमा के बढ़निझरिया गांव में 11.69 लाख रुपये की लागत से नए आंगनबाड़ी भवन का निर्माण किया गया है। नया भवन बच्चों के साथ गर्भवती और शिशुवती माताओं के लिए भी बेहतर सुविधाओं का केंद्र बना है। भवन निर्माण के दौरान स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार भी मिला और कुल 439 मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ।
आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता सुमित्रा व्यापारी के अनुसार वर्तमान में केंद्र से 60 बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। इनमें 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 22 और 6 माह से 3 वर्ष आयु वर्ग के 38 बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा 8 शिशुवती और 9 गर्भवती माताएं भी केंद्र की सेवाओं से जुड़ी हैं। बच्चों को नियमित पोषण आहार दिया जा रहा है, जबकि गर्भवती और शिशुवती माताओं को पूरक पोषण के साथ स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता संबंधी जानकारी दी जा रही है।
नए भवन की दीवारों पर बने अक्षर, शिक्षाप्रद चित्र और आकर्षक कार्टून बच्चों के लिए सीखने का रोचक माध्यम बन गए हैं। पर्याप्त जगह मिलने से बच्चे खेलते हुए सीखने, सामूहिक गतिविधियों में हिस्सा लेने और अपनी रचनात्मकता को विकसित करने का अवसर पा रहे हैं। इस तरह आंगनबाड़ी केंद्र अब केवल पोषण का स्थान नहीं, बल्कि बच्चों की शुरुआती शिक्षा और सीखने की पहली पाठशाला के रूप में भी विकसित हो रहा है।
भवन निर्माण का लाभ स्थानीय ग्रामीणों को भी मिला। निर्माण कार्य के दौरान 439 मानव दिवस का रोजगार सृजित होने से ग्रामीण परिवारों को गांव में ही काम मिला। इससे एक ओर स्थायी सार्वजनिक परिसंपत्ति तैयार हुई, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार का अवसर भी उपलब्ध हुआ। यह अधोसंरचना निर्माण और ग्रामीण रोजगार के बीच मजबूत जुड़ाव को दर्शाता है।
भाटापारा आंगनबाड़ी केंद्र में आया बदलाव केवल किराए के दो कमरों से नए भवन तक पहुंचने की कहानी नहीं है, बल्कि बच्चों की शिक्षा और पोषण, माताओं की देखभाल और ग्रामीणों के रोजगार से जुड़ी व्यापक तस्वीर है। अब बच्चों के लिए बेहतर सीखने और खेलने की जगह, माताओं के लिए पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन और गांव के लिए एक स्थायी सार्वजनिक सुविधा उपलब्ध है। सेवा संकल्प अभियान के बीच यह बदलाव बताता है कि गांव तक पहुंचने वाली एक विकास परियोजना का असर कई स्तरों पर दिखाई दे सकता है।