छत्तीसगढ़ में जियो-पोर्टल से बदलेगा योजनाओं का नियोजन, AI चैटबॉट से एक क्लिक में मिलेगी भौगोलिक जानकारी
190 से अधिक GIS डेटा लेयर्स का एकीकरण, 35 से ज्यादा तकनीकी टूल्स विकसित; औद्योगिक भूमि चयन और बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार में भी मिलेगी मदद
रायपुर, छत्तीसगढ़ में विकास योजनाओं के निर्माण और सरकारी कामकाज में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए जियो-पोर्टल का विस्तार किया जा रहा है। इसके जरिए अब सरकारी विभागों को भौगोलिक आंकड़ों के आधार पर योजनाएं तैयार करने, संसाधनों का आकलन करने और विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि जियो-पोर्टल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित चैटबॉट की सुविधा भी शुरू की गई है, जिससे एक क्लिक पर संबंधित स्थान की जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।
इस संबंध में छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) की ओर से नवा रायपुर में ‘शासन में भू-स्थानिक तकनीक का उपयोग’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें प्रदेश के विभिन्न विभागों के 200 से अधिक अधिकारियों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में राज्य स्तरीय जियो-पोर्टल, डिसीजन सपोर्ट सिस्टम और AI आधारित तकनीकों के माध्यम से सरकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई।
कार्यशाला का शुभारंभ इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद ने किया। उन्होंने बताया कि चिप्स ने अब तक 190 से अधिक GIS डेटा लेयर्स को एकीकृत किया है। इनके आधार पर 35 से अधिक GIS आधारित टूल्स और समाधान विकसित किए गए हैं। इनका उपयोग कर विभाग भौगोलिक आंकड़ों का विश्लेषण करने, उपलब्ध संसाधनों की स्थिति समझने और स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास योजनाएं तैयार कर सकेंगे। जियो-पोर्टल के इस्तेमाल के लिए सभी जिलों को यूजर नेम और पासवर्ड भी जारी किए जा चुके हैं।
AI चैटबॉट से आसान होगी जानकारी की खोज
जियो-पोर्टल में शुरू की गई AI आधारित चैटबॉट सुविधा अधिकारियों के लिए खास उपयोगी होगी। अब किसी क्षेत्र, स्थान, परिसंपत्ति या स्थल की जानकारी प्राप्त करने के लिए लंबी सूची खंगालने या ड्रॉप-डाउन मेन्यू में खोजने की जरूरत नहीं होगी। उपयोगकर्ता चैटबॉट में संबंधित स्थान का नाम दर्ज करेंगे और पोर्टल का नक्शा सीधे उस स्थान पर पहुंच जाएगा। इसके साथ ही संबंधित भौगोलिक जानकारी और जरूरी दिशा-निर्देश भी स्क्रीन पर दिखाई देंगे।
औद्योगिक भूमि और बैंकिंग सेवाओं के विस्तार में उपयोग
चिप्स के सीईओ मयंक अग्रवाल ने कार्यशाला में GIS तकनीक के व्यावहारिक उपयोगों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन औद्योगिक भूमि के चयन के लिए ‘लैंड पैच एनालिसिस’ का उपयोग कर रहा है। इससे संभावित औद्योगिक भूखंडों की पहचान और उपलब्ध जमीन का डिजिटल विश्लेषण कर उपयुक्त स्थान चुनने में मदद मिलेगी।
इसी तरह संस्थागत वित्त संचालनालय बैंकिंग सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों की पहचान के लिए ‘बैंक कवरेज एनालिसिस’ का उपयोग कर रहा है। इसके आधार पर उन क्षेत्रों का पता लगाया जा सकेगा, जहां नई बैंक शाखाएं स्थापित करने की आवश्यकता है। इस तकनीक का उपयोग औद्योगिक विकास के साथ वित्तीय समावेशन, संसाधन प्रबंधन और जनसुविधाओं के विस्तार में भी किया जा सकेगा।
कार्यशाला में ईसरी इंडिया और ऑक्टेव इंडिया के विशेषज्ञों ने GIS तकनीक के नवीनतम अनुप्रयोगों और आधुनिक भू-स्थानिक समाधानों पर प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान अधिकारियों और विशेषज्ञों ने विभागीय जरूरतों के अनुसार तकनीकी समाधान विकसित करने और डेटा विश्लेषण के उपयोग पर भी विचार-विमर्श किया।
कार्यशाला में ईसरी इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत जोशी, पीयूष मिश्रा, ऑक्टेव इंडिया के विवेक चौहान, चंचल मुखर्जी, चिप्स के सीईओ मयंक अग्रवाल, संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुपम आशीष टोप्पो, परियोजना प्रमुख संदीप टिकरिहा और हरीश सिन्हा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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