साइकिल मिली तो आसान हुई स्कूल की राह, सेदम की बेटियों के सपनों को मिले पंख
सेवा संकल्प अभियान
रायपुर, स्कूल जाने के लिए रोज लंबी दूरी पैदल तय करना अब सेदम की छात्राओं की मजबूरी नहीं रही। सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड के शासकीय हाई स्कूल सेदम में पढ़ने वाली रजनी एक्का, गायत्री यादव, सोनिया, रजनी साहू और नीतू यादव के लिए सरस्वती साइकिल योजना के तहत मिली साइकिल ने पढ़ाई की राह आसान कर दी है। पहले जहां स्कूल पहुंचने में समय और मेहनत दोनों लगते थे, वहीं अब छात्राएं कम समय में विद्यालय पहुंच रही हैं।
ग्रामीण इलाकों में घर से स्कूल की दूरी और सीमित परिवहन सुविधाएं अक्सर छात्राओं के लिए पढ़ाई जारी रखने में चुनौती बनती हैं। ऐसे में साइकिल उनके लिए सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं, बल्कि रोज की इस परेशानी को कम करने का जरिया बनी है। साइकिल मिलने से समय की बचत हो रही है और छात्राओं को पढ़ाई के लिए भी अतिरिक्त समय मिल रहा है।
पहले पैदल स्कूल जाने में लगता था ज्यादा समय
सेदम की छात्राएं बताती हैं कि साइकिल मिलने से पहले उन्हें स्कूल आने-जाने के लिए पैदल चलना पड़ता था। गर्मी, बारिश और ठंड के मौसम में लंबी दूरी तय करना और भी मुश्किल हो जाता था। पैदल आने-जाने में समय के साथ थकान भी होती थी, जिसका असर पढ़ाई पर पड़ता था।
अब साइकिल से यही दूरी कम समय में पूरी हो जाती है। छात्राएं समय पर स्कूल पहुंच पा रही हैं और घर लौटने में भी पहले के मुकाबले कम समय लग रहा है। आने-जाने में बचने वाले समय का उपयोग वे पढ़ाई और घर के जरूरी कामों के लिए कर रही हैं।
साइकिल से बढ़ा आत्मविश्वास
छात्राओं के लिए इस योजना का असर सिर्फ समय बचने तक सीमित नहीं है। अब वे खुद साइकिल चलाकर स्कूल पहुंचती हैं, जिससे रोजमर्रा के आवागमन में उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ी है। पहले किसी परिजन के साथ या पैदल स्कूल जाने की जरूरत पड़ती थी, लेकिन अब वे अपनी यात्रा खुद तय कर पा रही हैं।
छात्राओं का कहना है कि साइकिल मिलने के बाद स्कूल जाने में सुविधा तो हुई ही है, साथ ही पढ़ाई को लेकर उत्साह भी बढ़ा है। कम समय में स्कूल पहुंचने से पढ़ाई के लिए ज्यादा समय मिल रहा है और वे आगे भी अपनी शिक्षा जारी रखकर उच्च शिक्षा हासिल करना चाहती हैं।
ग्रामीण बेटियों के लिए बड़ी सुविधा
सरस्वती साइकिल योजना के तहत कक्षा 9वीं में अध्ययनरत पात्र छात्राओं को निःशुल्क साइकिल दी जाती है। ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में इस योजना का महत्व और बढ़ जाता है, जहां सार्वजनिक परिवहन के साधन सीमित होते हैं और विद्यालय तक पहुंचने के लिए छात्राओं को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
स्कूल तक पहुंच आसान होने से छात्राओं के लिए नियमित रूप से विद्यालय जाना सुविधाजनक होता है। इससे पढ़ाई से जुड़े रहने, समय बचाने और आगे की शिक्षा के लिए तैयारी करने का अवसर भी बढ़ता है।
बेटियों की पढ़ाई से मजबूत होगा भविष्य
एक बेटी की शिक्षा का असर उसके अपने भविष्य के साथ पूरे परिवार पर पड़ता है। पढ़ाई से बेटियों में अपने अधिकारों और अवसरों को लेकर जागरूकता बढ़ती है और वे आगे उच्च शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार की दिशा में कदम बढ़ा सकती हैं।
सेदम की छात्राओं की कहानी भी इसी बदलाव की तस्वीर दिखाती है। साइकिल के पहियों के साथ स्कूल तक पहुंचने वाली इन बेटियों के लिए रास्ता अब पहले से आसान है। समय की बचत और बढ़े आत्मविश्वास के साथ उनके कदम आगे की पढ़ाई और अपने सपनों को पूरा करने की ओर बढ़ रहे हैं।