कुसुम के खेती बनीस लाभ के सउदा
थोरकिन पानी म किसान मन ल जादा मुनाफा
रायपुर. गरमी दिन के धान के बदला कुसुम के खेती ह किसान मन बर बड़े लाभ के सउदा साबित होवत हे। कृषि विभाग कोति ले किसान मन ल कम पानी म जादा पैदावार देवइया फसल मन डाहर प्रोत्साहित करे जावत हे, जेकर सुघर परिणाम अब दिखना सुरु हो गे हे।
बलौदाबाजार जिला के पलारी विकासखंड के ग्राम मुसुवाडीह के रहइया किसान वामन टिकरिहा ह एकर एक बड़े उदाहरण आय। राज्य स्तरीय डॉ. खुबचंद बघेल कृषक रत्न ले सम्मानित श्री टिकरिहा ह ए साल 10 एकड़ म कुसुम के खेती करत हे। पिछला साल ओमन गरमी दिन म धान के खेती करे रहिन, फेर जमीन के पानी (भूजल स्तर) ह नीचे गिर गे के सेती ओमन ल नुकसान सहिना पड़िस। कृषि विभाग के सलाह म ए साल ओमन कुसुम के खेती ल अपनाइन, जउन ह कम पानी अउ कम खरचा म जादा फायदा देवइया हे।
कुसुम फसल के एक बड़ विशेषता ए हे कि एकर पौधा म कांटा होथे, जेकर सेती गरुआ-बइला (मवेसी) मन एला नइ खांय, अउ किसान मन ल एकर रखवारी बर कोनो अलग ले घेरा-बेवस्था करे के जरूरत नइ पड़े। श्री टिकरिहा ह प्राकृतिक खेती ल घलो बढ़ावा देवत हें। ओमन छेना-गोबर अउ गौमूत्र ले जीवामृत, बीजामृत अउ घनजीवामृत बना के उपयोग करत हें। कुसुम के फसल ह 150 ले 180 दिन म तइयार हो जाथे अउ एमा 25 ले 45 प्रतिशत तक तेल के मात्रा मिलथे।