सरगुजा में 1,733 घरों की छतों पर सोलर पैनल, बिजली उपभोक्ता अब बन रहे ऊर्जा उत्पादक
रायपुर। घर की छत पर लगे सोलर पैनल अब सिर्फ बिजली बचाने का जरिया नहीं रह गए हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के जरिए सरगुजा में कई परिवार बिजली उत्पादन की प्रक्रिया से भी जुड़ रहे हैं। जिले में अब तक 1,733 घरों में रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाए जा चुके हैं। इससे परिवारों को बिजली खर्च में राहत मिलने के साथ स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है।
वर्ष 2025-26 के लिए सरगुजा में 2,000 रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने का लक्ष्य रखा गया था। इसके मुकाबले 3,282 आवेदन मिले हैं। इनमें से 3,222 आवेदनों में वेंडर का चयन हो चुका है, जबकि 1,733 घरों में संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में योजना को लेकर लोगों की दिलचस्पी दिखाई दे रही है।
अम्बिकापुर में लक्ष्य से दोगुने से ज्यादा आवेदन
अम्बिकापुर शहर में 1,000 संयंत्र लगाने के लक्ष्य के मुकाबले 2,158 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 1,360 घरों में सोलर संयंत्र लगाए जा चुके हैं। वहीं अम्बिकापुर ग्रामीण क्षेत्र में 1,000 के लक्ष्य के विरुद्ध 1,124 आवेदन मिले हैं और 373 घरों में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए गए हैं।
योजना के तहत पात्र परिवारों को केंद्र और राज्य सरकार की ओर से निर्धारित प्रावधानों के अनुसार वित्तीय सहायता मिलती है। सब्सिडी से सोलर संयंत्र लगाने की शुरुआती लागत कम होती है। घर की जरूरत पूरी होने के बाद अतिरिक्त बिजली को निर्धारित व्यवस्था के तहत ग्रिड में भेजने का विकल्प भी उपलब्ध है।
4-5 हजार का बिजली बिल, अब सोलर से राहत
अम्बिकापुर के दर्रीपारा निवासी विनोद कुमार राय का परिवार भी इस बदलाव का उदाहरण है। सोलर संयंत्र लगाने से पहले उनके घर का बिजली बिल कई बार 4 से 5 हजार रुपए प्रतिमाह तक पहुंच जाता था। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने आवेदन किया और घर की छत पर सोलर संयंत्र लगवाया।
करीब 2 लाख रुपए की लागत वाले संयंत्र पर उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार और राज्य सरकार से 30 हजार रुपए की सब्सिडी मिली। यानी कुल 1.08 लाख रुपए की सहायता मिली। राय ने सब्सिडी की राशि सोलर संयंत्र के लिए लिए गए बैंक ऋण में जमा कर दी। अब सौर ऊर्जा से घर की बिजली जरूरत पूरी होने के साथ कई बार अतिरिक्त बिजली भी ग्रिड में चली जाती है।
नीधि वर्मा के परिवार को भी मिली बिजली खर्च में राहत
अम्बिकापुर के मायापुर निवासी नीधि वर्मा ने भी अपने घर पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कराया है। उनके मुताबिक सोलर सिस्टम लगाने से पहले घर का बिजली बिल करीब 4 से 5 हजार रुपए प्रतिमाह आता था। अब घर की बिजली जरूरत का एक हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा होने के कारण बिजली खर्च में राहत मिली है।
उन्हें भी केंद्र की 78 हजार और राज्य की 30 हजार रुपए की सहायता सहित कुल 1.08 लाख रुपए की सब्सिडी मिली। उनका कहना है कि पहले उनका परिवार सिर्फ बिजली का उपभोक्ता था, लेकिन अब घर की छत बिजली उत्पादन का भी माध्यम बन गई है।
स्मार्ट मीटर और ऐप से बिजली खपत पर नजर
रूफटॉप सोलर के साथ स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप जैसी डिजिटल सुविधाएं भी बिजली उपयोग को समझने में मदद कर रही हैं। उपभोक्ता अपनी बिजली खपत की जानकारी देखकर जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल को नियंत्रित कर सकते हैं।
विनोद कुमार राय के मुताबिक स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप के जरिए वे रोजाना बिजली खपत पर नजर रखते हैं। इससे परिवार में बिजली के जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर जागरूकता बढ़ी है और अनावश्यक रूप से चल रहे उपकरणों को बंद करने की आदत भी बनी है।
हर छत से स्वच्छ ऊर्जा की ओर कदम
रूफटॉप सोलर का फायदा सिर्फ बिजली के बिल तक सीमित नहीं है। सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है। एक घर की छत पर लगा सोलर संयंत्र छोटी इकाई हो सकता है, लेकिन बड़ी संख्या में परिवार इससे जुड़ें तो इसका सामूहिक प्रभाव भी बढ़ता है।
सरगुजा में मिले आवेदनों और अब तक लगाए गए संयंत्रों के आंकड़े बताते हैं कि शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण परिवार भी सौर ऊर्जा को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। विनोद कुमार राय और नीधि वर्मा जैसे परिवारों के अनुभव बताते हैं कि घर की छत अब सिर्फ रहने की जगह का हिस्सा नहीं, बल्कि ऊर्जा उत्पादन का माध्यम भी बन सकती है।