सफलता के कहानी : चूल्हा-चौका ले बिजनस तक: गायत्री समूह के 12 महिला मन ह टेंट हाउस ले लिखिन सफलता के नवा कहानी
आत्मनिर्भरता अउ सशक्तिकरण के मिसाल बनिस गायत्री महिला स्व-सहायता समूह
रायपुर. आत्मनिर्भरता अउ सशक्तिकरण के असली मिसाल हमर गांव-गंवई के ओ महिला मन हें, जेमन स्व-सहायता समूह अउ सरकारी योजना ले जुड़ के अपन करम ला बदल डारिन। महिला मन के ए संघर्ष ह देखाथे कि आत्मनिर्भर होय ले न केवल आर्थिक स्थिति सुधरथे, बल्कि समाज में मान-सम्मान अउ फैसला लेवे के अधिकार घलो मिलथे। आज महिला मन घर के देहरी ले निकल के उद्यमी (बिजनसमैन) बनत हें, जे ह आत्मनिर्भर भारत के एक सुग्घर उदाहरण आय।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला के सीपत क्षेत्र में बसे ग्राम कर्रा (हि.) के महिला मन ह ये साबित कर दीन कि अगर इरादा मजबूत होय, त सफलता ह गोड़ चूमथे। बिहान योजना ले जुड़ के गायत्री महिला स्व-सहायता समूह के महिला मन ह मिल-जुल के अउ अटूट बिसवास के दम में न केवल पइसा टका कमाए के रद्दा खोजिन, बल्कि समाज के आघू सशक्तिकरण के एक मिसाल घलो राखिन। ये बात ह सिद्ध करथे कि कौशल विकास, आत्मविश्वास अउ सरकारी मदद (मुद्रा ऋण) ले महिला मन न केवल अपन परिवार ला, बल्कि पूरा समाज ला मजबूत बनावत हें।

कुशल नेतृत्व अउ सरकारी योजना के संगम
गौरी यादव (अध्यक्ष) अउ पांचो श्रीवास (सचिव) के अगुवाई में चलत ए 12 सदस्यीय समूह ला सरकार के योजना ले बड़ सहारा मिलिस। उमन ला:
- बिहान योजना ले 6 लाख रुपया के करजा (ऋण) मिलिस।
- एकीकृत महिला एवं बाल विकास विभाग ले 4 लाख रुपया के मदद मिलिस।
कुल 10 लाख रुपया के पूँजी लगा के ए महिला मन ह “श्री राम टेंट हाउस” के नाम ले अपन नवा काम-धंधा के शुरुआत करिन। आज ए टेंट हाउस के माध्यम ले ए महिला मन ह अपन घर-परिवार ला बढ़िया ढंग ले चलावत हें अउ दूसर बर प्रेरणा बन गे हें।