कहानी, कला और किताबों से जुड़ी रचनात्मक गतिविधियों में जुटे शिक्षक
रायपुर, बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मक सोच और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय ‘कहानीकार’ कार्यशाला का मंगलवार को समापन हुआ। दूसरे दिन प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे शिक्षकों ने कहानी लेखन, रचनात्मक गतिविधियों और संवादात्मक सत्रों में भाग लिया। कार्यशाला का आयोजन आईआईएसईआर पुणे के केयर प्रोजेक्ट, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़, यूनिसेफ और छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर के संयुक्त सहयोग से किया गया।
कार्यशाला में शिक्षकों ने अपनी कहानियों को विकसित कर एक-दूसरे के साथ साझा किया। स्टोरीटेलिंग और संवादात्मक गतिविधियों के जरिए स्थानीय परिवेश, दैनिक अनुभवों और प्रकृति को कहानियों से जोड़कर बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक रोचक बनाने के तरीकों पर चर्चा हुई। शिक्षकों को बताया गया कि कहानी बच्चों में अवलोकन, सवाल पूछने, कल्पनाशीलता, स्वतंत्र सोच और अपनी बात व्यक्त करने की क्षमता विकसित करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
दूसरे दिन आयोजित ‘कहानीकार पुस्तक मेला’ कार्यशाला का खास आकर्षण रहा। शिक्षकों ने विभिन्न पुस्तकों और कहानियों से परिचित होकर यह समझा कि किताबों को कक्षा की गतिविधियों से जोड़कर बच्चों में पढ़ने की रुचि और रचनात्मकता को बढ़ाया जा सकता है। पुस्तकों को ज्ञान, कल्पना और संवाद का प्रभावी माध्यम बनाने पर भी जोर दिया गया।
कार्यशाला में कहानी और कला के माध्यम से बच्चों को प्रकृति एवं पर्यावरण से जोड़ने पर विशेष चर्चा हुई। शिक्षकों को अपने आसपास के पर्यावरण का अवलोकन करने, सवाल उठाने और अनुभवों को कहानी के रूप में व्यक्त करने के अवसर बच्चों को देने के लिए प्रेरित किया गया। पर्यावरणीय संवेदनशीलता को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर बच्चों के दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाने की जरूरत बताई गई।
इस दौरान बच्चों के लिए भारत के पहले द्विभाषी हिंदी-अंग्रेजी क्लाइमेट टैब्लॉइड ‘जुगनू’ की जानकारी भी दी गई। आईआईएसईआर पुणे के केयर प्रोजेक्ट की एक्शन रिसर्च से विकसित ‘जुगनू’ में बच्चों और शिक्षकों की कहानियों, स्थानीय अनुभवों तथा प्रकृति और जलवायु से जुड़ी रचनात्मक सामग्री को मंच देने की पहल की गई है। प्रोजेक्ट लीड एवं पब्लिशर डॉ. शालिनी शर्मा ने बताया कि इसका उद्देश्य बच्चों को पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने, सवाल पूछने और सकारात्मक बदलाव के लिए पहल करने के लिए प्रेरित करना है।
समापन सत्र में शिक्षकों ने दो दिनों की सीख और अनुभव साझा किए। इसके बाद छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. शिरीष कुमार सिंह और एनआईटी रायपुर के प्रोफेसर डॉ. राज कुमार साहू की मौजूदगी में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। कार्यशाला ने शिक्षकों को शिक्षा को स्थानीय परिवेश, प्रकृति और बच्चों के अनुभवों से जोड़ने के रचनात्मक तरीकों से परिचित कराया।