आज के गोठ-बात गीग मजदूर मन के नवा जिनगी के संखनाद: शोभा सिंहदेव
- देस म 80 लाख ले जादा अउ छत्तीसगढ़ म दू लाख गीग वर्कर हें
- ई-श्रम पोर्टल म अब होवन लगिस गीग मजदूर मन के घलो पंजीयन
- महाराष्ट्र मंडल म गीग मजदूर मन के समाजिक सुरछा अउ तरक्की बर होयिस संगोष्ठी
रायपुर. गीग मजदूर यानी ओला, उबर, जोमेटो, रैपिडो, स्विगी, अमेजन अउ फ्लिपकार्ट असन कंपनी म काम करइया मनखे, जेमन ला कंपनी ह ‘पार्टनर’ तो कहिथे फेर ओ मन के सुरछा अउ जिम्मेदारी कोती धियान नई दय। गीग मजदूर मन बर आज महाराष्ट्र मंडल म आयोजित ए संगोष्ठी ओ मन के उद्धार के संखनाद हे। भारतीय मजदूर संघ के अध्यक्ष शोभा सिंहदेव ह कहिन कि गीग मजदूर मन ला अब ‘यूनियन’ के जरूरत हे, काबर कि एकता म ही सक्ति होथे।
संगोष्ठी म शोभा सिंहदेव ह कहिन कि ऑनलाइन सेवा देवइया कंपनी मन तुमन ला पार्टनर कहिके बुनियादी सुविधा मन ले दूर रखथें। ए सुविधा मन ला पाय बर संगठित रहना बहुत जरूरी हे।छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा ह कहिन कि संगठन के सक्ति ले ही आज केंद्र म मोदी सरकार बइठे हे। जे मनखे घलो घर पहुंच सेवा (Home Delivery) देथे, ओ ह गीग वर्कर आय। सरकार के चार नवा श्रम कानून मजदूर मन के हित म हे।
कर्मकार मंडल के पूर्व अध्यक्ष मोहन एंटी ह बताइन कि गीग वर्कर मन ला अपन अधिकार जानना जरूरी हे। अब तुमन ई-श्रम पोर्टल म पंजीयन करा सकथो। श्रमिक पंजीयन ले तुमन ला 2 लाख रूपया के बीमा के अधिकार मिलथे। यदि कोनो कंपनी तुमन ला बिना मतलब के ‘आईडी ब्लॉक’ कर देथे, तो ओखर खिलाफ सुनवाई के घलो अधिकार हे। फेर अपन कर्तव्य घलो निभाना हे, कंपनी ला सही जानकारी देव अउ एग्रीमेंट ला पढ़ के ही दस्तखत करव।
स्वतंत्र श्रमिक शोधार्थी शुभांगी शुक्ला ह बताइन कि देस के जीडीपी (GDP) म गीग मजदूर मन के लगभग 2 प्रतिशत योगदान हे। राजस्थान, कर्नाटक अउ तेलंगाना असन राज्य मन म गीग मजदूर मन बर कानून बन गे हे, अउ छत्तीसगढ़ म घलो एखर तैयारी चलत हे।
‘मोर संगवारी’ प्रोजेक्ट के मैनेजर परितोष डोनगांवकर ह बताइन कि अब ई-श्रम पोर्टल म गीग मजदूर मन बर अलग ले विकल्प दे गे हे, जेम कंपनी के नाम लिख के पंजीयन कराए जा सकथे।महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ह कहिन कि ए संगोष्ठी गीग मजदूर मन के सफलता के पहिली सीढ़ी आय। कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल कोती ले 20 गीग मजदूर मन ला साइकिल बिसाये बर 3697-3697 रूपया के चेक घलो बांटे गय।