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कचरे से ‘कमाल’: फ्लाई-ऐश और रबर से बन रहीं शानदार सड़कें, NHAI ने पेश की पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल

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June 5, 2026 3 Mins Read
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विश्व पर्यावरण दिवस विशेष: प्रकृति और विकास का बेहतरीन संतुलन

• ग्रीन हाईवे: थर्मल पावर प्लांट की करोड़ों मीट्रिक टन राख (फ्लाई-ऐश) और स्टील अपशिष्ट से हो रहा सड़कों का निर्माण।

• वन्यजीवों की सुरक्षा: छत्तीसगढ़ के सीतानदी-उदंती अभ्यारण्य में बन रही 3 किमी लंबी सुरंग, बनेंगे मंकी-कैनोपी और एलिफेंट-पास।

• जल व हरियाली संरक्षण: सीवरेज के पानी का हो रहा उपयोग, हाईवे किनारे विकसित होंगे बी-कॉरिडोर और मेडिसीन पार्क।

आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास और पर्यावरण संरक्षण, दोनों अक्सर एक-दूसरे के विपरीत माने जाते हैं। लेकिन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस धारणा को बदल दिया है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर NHAI का वह मॉडल चर्चा में है, जहां औद्योगिक कचरे का बेहतरीन इस्तेमाल कर ‘इको-फ्रेंडली’ (पर्यावरण-अनुकूल) सड़कें बनाई जा रही हैं। प्रकृति, वन्य जीव और आधुनिकता के बीच संतुलन का यह अनूठा प्रयोग विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की विभिन्न सड़क परियोजनाओं में धरातल पर उतरता दिख रहा है।

सड़क 05

फ्लाई-ऐश और रबर से ‘ग्रीन हाईवे’ का निर्माण

सड़क निर्माण में अब पहाड़ और मिट्टी काटने के बजाय कचरे की रिसाइक्लिंग पर जोर दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के थर्मल पावर प्लांट्स से निकलने वाली फ्लाई-ऐश (राख) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

  • आंकड़ों पर एक नजर: वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 2.17 करोड़ मीट्रिक टन और वर्ष 2025-26 में 62 लाख मीट्रिक टन फ्लाई-ऐश को सड़क निर्माण में खपाया गया। वहीं वर्तमान वित्तीय वर्ष (2026-27) में अब तक 20 लाख मीट्रिक टन राख का उपयोग हो चुका है।
  • राख के अलावा स्टील उद्योग के स्लैग, पुराने बेकार टायरों के रबर और बायो-बिटुमेन जैसी वैकल्पिक सामग्रियों को भी रिसायकल कर सड़क निर्माण में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आ रही है।
सड़क 05 1

वन्यजीवों के लिए अत्याधुनिक इको-फ्रेंडली इन्फ्रास्ट्रक्चर

राजमार्गों के निर्माण से जंगली जानवरों का जीवन प्रभावित न हो, इसके लिए NHAI संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्रों में विशेष काम कर रहा है। छत्तीसगढ़ के सीतानदी-उदंती अभ्यारण्य के बेहद संवेदनशील क्षेत्र में 3 किलोमीटर लंबी अत्याधुनिक भूमिगत सुरंग बनाई जा रही है। इससे जंगल के शांत माहौल में वाहनों की आवाजाही का असर शून्य हो जाएगा।

जानवरों के लिए खास सुविधाएं: वाहनों के शोर से वन्य जीव विचलित न हों, इसके लिए साउंड बैरियर्स लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा पेड़ों पर रहने वाले जीवों के लिए ‘मंकी-कैनोपी’ और हाथियों व अन्य जानवरों के सुरक्षित विचरण के लिए ‘एलिफेंट-पास’ व ‘एनिमल-अंडरपास’ बनाए जा रहे हैं।

सड़क 01

जल संरक्षण: सीवरेज के पानी से निर्माण

सड़क निर्माण में पीने योग्य साफ पानी की बर्बादी रोकने के लिए एक शानदार पहल की गई है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से प्राप्त 323 किलोलीटर शोधित (ट्रीटेड) जल का उपयोग निर्माण कार्यों और पौधों की सिंचाई में किया गया। भूजल संवर्धन के लिए देशभर में हाईवे के किनारे 13 अमृत सरोवरों का जीर्णोद्धार किया गया है। साथ ही वर्षा जल संचयन के लिए वाटर हार्वेस्टिंग पिट्स की संख्या 14 से बढ़ाकर 105 कर दी गई है।

सड़क 02

बी-कॉरिडोर और मेडिसीन पार्क से किसानों को लाभ

NHAI हाईवे को सिर्फ डामर की सड़क नहीं, बल्कि एक ‘जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र’ में बदल रहा है।

  • बी-कॉरिडोर (मधुमक्खी गलियारा): छत्तीसगढ़ के मैदानी और वनांचल मार्गों के किनारे विशेष मधुमक्खी गलियारे विकसित किए जा रहे हैं। इससे आसपास के खेतों में प्राकृतिक परागण (Pollination) बढ़ेगा, जिससे किसानों की फसल उत्पादकता में इजाफा होगा।
  • मेडिसीन पार्क: बंजर और खाली पड़ी जमीनों पर नीम, तुलसी, एलोवेरा और आंवला जैसे हजारों औषधीय पौधे लगाकर ‘औषधि वन’ तैयार किए जा रहे हैं।

इसके साथ ही, “एक पेड़ माँ के नाम 2.0” अभियान के तहत बीते वर्ष छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे और डिवाइडर्स पर ढाई लाख से अधिक पौधों का रोपण कर हरित राजमार्ग का एक नया कीर्तिमान रचा गया है।

सड़क 04

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Chhattisgarh DevelopmentEco Friendly InfrastructureFly Ash RoadsGreen HighwayNature And ProgressNHAISitanadi UdantiWild life ConservationWorld Environment Day

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