एक गाय से शुरू हुआ सफर, आज 10 पशुओं का समृद्ध पशुधन
रायपुर, एक गाय से शुरू हुआ पशुपालन का छोटा प्रयास आज 10 पशुओं के समृद्ध पशुधन में बदल चुका है। सरगुजा जिले के ग्राम चटीरमा निवासी अगस्तु खाखा ने मेहनत, लगन और पशुपालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से पशुपालन को परिवार की स्थायी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है। दूध की नियमित बिक्री से उन्हें हर महीने आय हो रही है, वहीं उन्नत नस्ल के पशुओं की बिक्री भी अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनी है।
अगस्तु ने पशुपालन की शुरुआत केवल एक गाय से की थी। इसी दौरान उन्हें पशुपालन विभाग के अधिकारियों से पशुओं की बेहतर देखभाल और नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान की जानकारी मिली। उन्होंने विभाग की सलाह को अपनाते हुए कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा का लाभ लेना शुरू किया। इससे धीरे-धीरे उनके पशुधन की संख्या बढ़ी और पशुपालन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने का अवसर मिला।
आज अगस्तु के पास कुल 10 पशु हैं। इनमें चार दुधारू गायों से प्रतिदिन करीब 30 लीटर दूध प्राप्त हो रहा है। दूध की बिक्री से परिवार को नियमित आय मिलती है। चारा, पशुओं की देखभाल और अन्य खर्च निकालने के बाद अगस्तु को पशुपालन से लगभग 15 हजार रुपये प्रतिमाह की शुद्ध आय हो रही है। नियमित आमदनी ने पशुपालन को उनके परिवार की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बना दिया है।
कृत्रिम गर्भाधान से तैयार उन्नत नस्ल के पशुओं ने अगस्तु की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अब तक चार गायों और दो बछड़ों की बिक्री कर करीब 1 लाख 60 हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी अर्जित की है। इस आय से परिवार को आर्थिक मजबूती मिली है और पशुपालन को और विस्तार देने का उनका भरोसा भी बढ़ा है।
वर्तमान में उनके पशुधन में दो बछियां गर्भित हैं, जिनसे आने वाले समय में नए बछड़ों के जन्म की उम्मीद है। इसके अलावा तीन छोटी बछियां भी भविष्य में पशुधन और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का आधार बनेंगी। अगस्तु अब पशुओं की संख्या बढ़ाकर अपनी आय को और मजबूत करने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि पशुपालन विभाग की तकनीकी सलाह और कृत्रिम गर्भाधान जैसी सुविधाओं से उन्हें अपने काम को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने में काफी मदद मिली है।
अगस्तु खाखा की कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन, वैज्ञानिक पशुपालन पद्धति और मेहनत के साथ छोटे स्तर से शुरू किया गया व्यवसाय भी ग्रामीण परिवार के लिए नियमित आय का मजबूत साधन बन सकता है। एक गाय से शुरू हुआ उनका सफर आज 10 पशुओं तक पहुंच चुका है और दूध उत्पादन के साथ पशुओं की बिक्री से भी आय का रास्ता खुला है। पशुधन बढ़ाने की उनकी तैयारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन की संभावनाओं को भी सामने रखती है।