दाऊ मंदराजी ने नाचा को दी अलग पहचान, लोक संस्कृति में उनका योगदान हमेशा याद रहेगा
छत्तीसगढ़ी लोकनाट्य ‘नाचा’ को नई पहचान देने वाले महान लोक कलाकार दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की पुण्यतिथि पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी की कला-साधना और लोक संस्कृति के प्रति उनका योगदान छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है।
संस्कृति मंत्री ने कहा कि दाऊ मंदराजी ने नाचा को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ के जनजीवन, लोकभाषा, सामाजिक सरोकारों और स्थानीय भावनाओं को मंच पर अभिव्यक्त करने का माध्यम बनाया। लोककला और कलाकारों के लिए उनका समर्पण उनकी सबसे बड़ी पहचान रहा।
पहली नाचा पार्टी का किया गठन
दाऊ मंदराजी ने कलाकारों को संगठित कर ‘रैली रिगनी साज’ नाचा दल बनाया, जिसे छत्तीसगढ़ की पहली नाचा पार्टी के रूप में जाना जाता है। उनके प्रयासों ने नाचा को गांवों की सीमाओं से बाहर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मंच से कई लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला।
दाऊ मंदराजी की नाचा शैली में छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की सहजता के साथ हास्य और व्यंग्य भी देखने को मिलता था। वे लोकभाषा और सामाजिक विषयों को इस तरह मंच पर लाते थे कि आम दर्शक उससे आसानी से जुड़ सके। यही वजह है कि उनकी कला ने लोगों के बीच अपनी अलग जगह बनाई।
नई पीढ़ी को लोककला से जोड़ना जरूरी
राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान उसकी लोक परंपराओं, लोककलाओं और कलाकारों से बनी है। दाऊ मंदराजी जैसे कलाकारों ने इन परंपराओं को आगे बढ़ाने का काम किया। उनकी कला-साधना से प्रेरणा लेकर नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की लोककला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि दाऊ मंदराजी की स्मृति में राज्य सरकार द्वारा लोक नाट्य एवं लोक शिल्प के क्षेत्र में ‘दाऊ मंदराजी सम्मान’ दिया जाता है। यह सम्मान उनके योगदान को याद करने और लोककला के क्षेत्र में काम करने वाले कलाकारों को प्रोत्साहित करने का एक माध्यम है।
मिट्टी, बोली और परंपरा से जुड़कर मिली नाचा को पहचान
संस्कृति मंत्री ने कहा कि दाऊ मंदराजी का जीवन यह संदेश देता है कि अपनी मिट्टी, बोली और परंपराओं से जुड़े रहते हुए भी कला को व्यापक पहचान दिलाई जा सकती है। नाचा के इस महान साधक की कला-साधना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए छत्तीसगढ़ की लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक विस्तार की जरूरत पर भी जोर दिया गया।