केज कल्चर से बढ़ेगा मछली उत्पादन, बीमारी की जल्द पहचान पर जोर
ICAR-CIFRI और मत्स्य विभाग की कार्यशाला में किसानों को मिली वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी
रायपुर, छत्तीसगढ़ के जलाशयों में केज कल्चर यानी पिंजरा पद्धति से मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य पालन विभाग और ICAR-CIFRI, बैरकपुर के संयुक्त आयोजन में दो दिवसीय कार्यशाला हुई। 8 और 9 सितंबर को रायपुर स्थित मत्स्य पालन विभाग कार्यालय में आयोजित कार्यशाला में मछलियों में होने वाली बीमारियों की समय पर पहचान, रोकथाम और प्रबंधन से जुड़ी तकनीकों की जानकारी दी गई।
कार्यशाला में ICAR-CIFRI के वैज्ञानिक डॉ. असित कुमार बेरा और श्रीमती सोहिनी चटर्जी ने केज कल्चर के साथ तालाबों में मछली पालन के दौरान होने वाले रोगों के लक्षण, बचाव और वैज्ञानिक उपचार के बारे में किसानों और विभागीय अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे करीब 50-60 केज कल्चर किसान और इतने ही पारंपरिक तालाब मत्स्य पालकों ने इसमें हिस्सा लिया।
कार्यशाला में फील्ड स्तर पर मछलियों में होने वाले रोगों की त्वरित जांच और डायग्नोस्टिक सुविधाओं को मजबूत करने पर चर्चा हुई। इसके साथ ही मैदानी कर्मचारियों के प्रशिक्षण और जलाशयों तथा मछलियों के स्वास्थ्य से जुड़ा डेटाबेस तैयार करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि बीमारी की शुरुआती स्तर पर पहचान और समय पर प्रबंधन से मछली उत्पादन में होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
कार्यक्रम में संचालक मत्स्य पालन एन.एस. नाग, मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा आनंद निषाद, उपाध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा डॉ. लखन लाल धीवर, उप-संचालक मत्स्य पालन प्रशिक्षण संस्थान बीना गड़पाले और सहायक मत्स्य अधिकारी विकास कुमार साहू सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
जलाशयों में वैज्ञानिकों ने किया केज कल्चर का निरीक्षण
कार्यशाला के बाद 10 सितंबर को ICAR-CIFRI के वैज्ञानिक डॉ. असित कुमार बेरा और श्रीमती सोहिनी चटर्जी ने प्रदेश के जलाशयों में पहुंचकर केज कल्चर का मैदानी निरीक्षण किया। उन्होंने स्थापित केज की स्थिति देखी और किसानों से मछलियों के स्वास्थ्य, रोग प्रबंधन और उत्पादन से जुड़ी जानकारी ली।
इस दौरान वैज्ञानिकों ने मौके पर ही मत्स्य पालकों को मछलियों के बेहतर स्वास्थ्य और उत्पादन के लिए जरूरी व्यावहारिक सुझाव दिए। विभाग के मुताबिक, वैज्ञानिक तकनीकों और नियमित स्वास्थ्य निगरानी को बढ़ावा देकर राज्य में केज कल्चर और अन्य मछली पालन गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित एवं लाभकारी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।