बिहान योजना से बदली गीता की जिंदगी, सब्जी खेती और बकरी पालन से बनीं आत्मनिर्भर
रायपुर, सारंगढ़ विकासखंड के ग्राम जेवरा की गीता मिरी ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। कभी घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली गीता आज सब्जी खेती और बकरी पालन के जरिए आत्मनिर्भर बनी हैं और गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
बिहान समूह से जुड़ने के बाद गीता को 50 हजार रुपये का उद्यमी ऋण मिला। उन्होंने इस राशि का उपयोग अपनी 80 डिसमिल भूमि पर आजीविका गतिविधि शुरू करने में किया। खेत में उन्होंने टमाटर, खीरा और करेला जैसी नकदी फसलों की खेती शुरू की। अच्छी पैदावार और बाजार में मांग के चलते उन्हें सब्जियों की बिक्री से प्रतिदिन करीब 3 से 4 हजार रुपये तक की आमदनी होने लगी।
गीता के अनुसार, अब तक वह सब्जी उत्पादन से करीब 2 लाख रुपये की आय अर्जित कर चुकी हैं। एक फसल चक्र में उन्हें लगभग 60 हजार रुपये का शुद्ध लाभ भी मिला। खेती से मिली सफलता के बाद उन्होंने आय के दूसरे स्रोत के रूप में बकरी पालन शुरू किया, जिससे उन्हें सालाना करीब 50 हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी हो रही है।
गीता का कहना है कि बिहान योजना और समूह से मिले सहयोग ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ नया आत्मविश्वास भी दिया है। खेती और पशुपालन के जरिए परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और अब वे अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। बिहान योजना के माध्यम से मिली आर्थिक सहायता और मार्गदर्शन ने उनके लिए आत्मनिर्भरता की नई राह खोली है।