अब सैटेलाइट से होगी धान के रकबे की निगरानी, खाद्य विभाग और CGCOST में हुआ करार
रायपुर, छत्तीसगढ़ में धान के रकबे का आकलन अब सैटेलाइट इमेजरी और आधुनिक तकनीक से किया जाएगा। इसके लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय और छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (CGCOST) के बीच एमओयू हुआ है। इस व्यवस्था के तहत रिमोट सेंसिंग और GIS तकनीक की मदद से धान की खेती वाले क्षेत्र की पहचान और उसका सत्यापन किया जाएगा।
इस तकनीकी व्यवस्था का मकसद खेतों में वास्तविक धान की फसल और सरकारी रिकॉर्ड के बीच बेहतर मिलान करना है। भू-अभिलेख, डिजिटल क्रॉप सर्वे और सैटेलाइट से मिले आंकड़ों को आपस में जोड़ा जाएगा। इससे धान के रकबे की जानकारी ज्यादा सटीक होने के साथ उपार्जन व्यवस्था में डेटा आधारित फैसले लेने में मदद मिलेगी।
FRA और डुबान क्षेत्रों की भी होगी डिजिटल मैपिंग
एमओयू के तहत वन अधिकार अधिनियम (FRA) और डुबान क्षेत्रों में मौजूद कृषि भूमि पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ऐसे कई कृषि भू-भागों की जियो-रेफरेंस्ड जानकारी उपलब्ध नहीं है। अब GIS के जरिए इन क्षेत्रों की डिजिटल मैपिंग कर पॉलीगॉन लेयर तैयार की जाएगी, जिससे हर कृषि क्षेत्र की डिजिटल भौगोलिक पहचान की जा सके।
इन क्षेत्रों में सैटेलाइट इमेजरी और रिमोट सेंसिंग के जरिए यह देखा जाएगा कि संबंधित जमीन पर धान की खेती है या नहीं। इससे उन इलाकों में भी फसल के वास्तविक रकबे की जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी, जहां पारंपरिक रिकॉर्ड के आधार पर डिजिटल सत्यापन में दिक्कत आती है।
Latitude-Longitude से खेत का होगा सत्यापन
जिन कृषि भू-खंडों की जियो-रेफरेंस्ड जानकारी पहले से उपलब्ध है, उनके Latitude-Longitude का सैटेलाइट इमेजरी से मिलान किया जाएगा। इसके आधार पर संबंधित खेत में धान की फसल की मौजूदगी का तकनीकी सत्यापन किया जा सकेगा। यानी रिकॉर्ड में दर्ज जमीन और मौके पर मौजूद फसल की स्थिति को डिजिटल तरीके से मिलाने की कोशिश होगी।
इससे बड़े क्षेत्र में धान की खेती का आकलन ज्यादा व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा और रकबे की जानकारी जुटाने में मानवीय निर्भरता भी कम होगी। खाद्य विभाग के मुताबिक, इससे डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए जरूरी भू-स्थानिक डेटा को भी मजबूत आधार मिलेगा।
धान खरीदी में बढ़ेगी डेटा की भूमिका
छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर धान खरीदी होती है। ऐसे में खेती के वास्तविक रकबे की सही जानकारी उपार्जन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। सैटेलाइट, GIS और डिजिटल क्रॉप सर्वे से मिले आंकड़ों के इस्तेमाल से धान के रकबे के सत्यापन को अधिक तकनीक आधारित बनाया जा सकेगा।
एमओयू के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले, खाद्य संचालनालय की संचालक डॉ. फरिहा आलम और CGCOST के संचालक कवीश्वर मौजूद रहे। नई व्यवस्था से भू-अभिलेख, फसल सर्वे और सैटेलाइट डेटा को एक साथ इस्तेमाल कर धान के रकबे की ज्यादा प्रमाणिक जानकारी तैयार करने की दिशा में काम होगा।