सेवा संकल्प अभियान 2026: घोलेंग में हुनर को मिल रही नई उड़ान
टेक्सटाइल प्रशिक्षण से महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार की राह हो रही मजबूत
रायपुर, जशपुर जिले के ग्राम घोलेंग में पारंपरिक हस्तकरघा कला को आधुनिक तकनीक और कौशल प्रशिक्षण से जोड़कर महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। आजीविका परिसर में संचालित टेक्सटाइल और हैंडलूम प्रशिक्षण के जरिए स्थानीय हुनर को बाजार की जरूरतों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और युवाओं को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने की दिशा में घोलेंग का यह प्रयास महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
प्रशिक्षण के साथ उत्पादन पर जोर
घोलेंग स्थित आजीविका परिसर में स्थानीय महिलाओं और युवाओं को टेक्सटाइल एवं हैंडलूम से जुड़े कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आदित्य बिरला ग्रुप, जिला प्रशासन, बिहान और टेक्सटाइल स्किल सेक्टर काउंसिल के संयुक्त प्रयास से संचालित इस पहल में प्रशिक्षण के साथ उत्पादन गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
लगभग 35 से 40 परिवारों और स्व सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को हैंडलूम एवं टेक्सटाइल कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महिलाएं आधुनिक मशीनों और तकनीक के माध्यम से कपड़ा तैयार करने के साथ शॉल, साड़ी और अन्य उपयोगी उत्पाद बनाना सीख रही हैं।
इस पहल का उद्देश्य प्रशिक्षण को केवल कौशल तक सीमित न रखकर उसे आय के साधन से जोड़ना है। प्रशिक्षण के साथ उत्पादन का अवसर मिलने से महिलाएं अपने हुनर का व्यावहारिक उपयोग कर रही हैं।
परंपरा और तकनीक का संगम
जशपुर अपनी जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय हस्तकला के लिए जाना जाता है। घोलेंग में इसी पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को डिजाइन, गुणवत्ता और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने की जानकारी भी दी जा रही है।
इससे हस्तकरघा कला को केवल परंपरा तक सीमित रखने के बजाय आधुनिक आर्थिक गतिविधि से जोड़ने की संभावनाएं बढ़ रही हैं। बेहतर गुणवत्ता और आकर्षक डिजाइन के जरिए स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
महिलाओं और युवाओं के लिए नए अवसर
इस पहल की प्रमुख कड़ी महिला स्व सहायता समूह हैं। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं समूहों के माध्यम से उत्पादन गतिविधियों में भागीदारी कर सकेंगी, जिससे उनकी आय के नए स्रोत विकसित होने की संभावना है। आर्थिक रूप से मजबूत होने से महिलाओं की परिवार के आर्थिक निर्णयों में भागीदारी भी बढ़ सकती है।
वहीं स्थानीय युवाओं को भी टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़े रोजगारपरक कौशल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
हुनर से आत्मनिर्भरता की ओर
घोलेंग का यह प्रयास कौशल, उत्पादन और बाजार के बीच मजबूत कड़ी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़कर ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की संभावनाएं तैयार हो रही हैं।
घोलेंग में शुरू हुई यह पहल इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय हुनर को सही प्रशिक्षण और अवसर मिले तो वही हुनर रोजगार, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकता है। इससे जशपुर के स्थानीय हस्तकरघा उत्पादों को नई पहचान मिलने के साथ ग्रामीण आजीविका को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।