महिलाओं के स्वावलंबन को मिल रहा संबल, साहूकारों पर निर्भरता की मजबूरी खत्म
ग्रामीण आजीविका मिशन से अब तक 1.38 करोड़ परिवार जुड़े, प्रदेश के सभी 75 जिलों में सक्रिय हैं महिला समूह
लखनऊ, उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संस्थागत ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत अब तक पौने दस लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों को 11,378 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया है। मिशन के प्रारंभ से अब तक प्रदेश में 11.85 लाख समूहों का गठन हुआ है, जिनसे 1.38 करोड़ परिवारों को जोड़ा गया है। इस वित्तीय सहयोग से महिलाओं को छोटे कारोबार शुरू करने और पहले से चल रहे काम को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है।
स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को नियमित बचत, बैंकिंग और संस्थागत वित्त से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इससे खेती, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और सेवा क्षेत्र में आजीविका के नए अवसर बन रहे हैं। समूहों को मिलने वाले ऋण से महिलाओं को कारोबार के लिए पूंजी उपलब्ध हो रही है और आर्थिक जरूरतों के लिए साहूकारों पर निर्भर रहने की मजबूरी कम करने में मदद मिल रही है।
छोटी बचत से कारोबार तक पहुंच रहीं महिलाएं
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के मुताबिक, स्वयं सहायता समूहों ने उन महिलाओं के लिए भी उद्यमिता के अवसर खोले हैं, जिनके पास शुरुआत में पर्याप्त पूंजी या बाजार तक सीधी पहुंच नहीं थी। महिलाएं मसाले, पापड़, अचार, मिलेट उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय उत्पादों के निर्माण जैसी गतिविधियों से आय अर्जित कर रही हैं। पशुपालन और दुग्ध उत्पादन भी ग्रामीण क्षेत्रों में कमाई के प्रमुख माध्यम बन रहे हैं।
समूहों में नियमित बचत और आंतरिक ऋण की व्यवस्था महिलाओं में वित्तीय अनुशासन विकसित कर रही है। समय पर ऋण वापसी और सामूहिक बचत के आधार पर समूहों की बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने की राह आसान होती है। इसके साथ ही उत्पादन के अलावा पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है, ताकि महिलाओं के छोटे उद्यमों को विस्तार मिल सके।
104 विकासखंडों से बढ़कर सभी 75 जिलों तक पहुंचा मिशन
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का दायरा पिछले वर्षों में बढ़ा है। वर्ष 2013-14 से 2016-17 के बीच यह प्रदेश के 104 विकासखंडों में संचालित था, जबकि अब इसका क्रियान्वयन सभी 75 जिलों में किया जा रहा है। ग्राम संगठन और संकुल स्तरीय संघ महिलाओं के समूहों के बीच समन्वय बनाने, प्रशिक्षण उपलब्ध कराने और बाजार से जुड़ाव मजबूत करने में भूमिका निभा रहे हैं।
मिशन के तहत तैयार सामुदायिक नेटवर्क महिलाओं को केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें समूह संचालन, वित्तीय प्रबंधन और फैसले लेने की प्रक्रिया में भी भागीदारी का अवसर देता है। संस्थागत ऋण, कौशल प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव के जरिए ग्रामीण महिलाओं के छोटे कारोबार को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।