मुख्यमंत्री के चौपाल के असर: सुशासन तिहार में होय घोषणा ऊपर झटकुन अमल
कबीरधाम जिला के बैगा बाहुल्य गांव कमराखोल में सुरू होइस जनहित के काम
रायपुर, कबीरधाम जिला के दुरिहा वनांचल अउ बैगा बाहुल्य गांव कमराखोल में ‘सुशासन तिहार’ के बखत होय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के चौपाल के असर अब जमीन में दिखे बर धर ले हे। गांव वाले मन ह चौपाल में जे मांग रखे रहिन, ओला मंजूर करत मुख्यमंत्री ह जे घोषणा करे रहिन, ओखर ऊपर जिला प्रशासन ह तुंरत कारवाही करत पीय के पानी, जल संरक्षण अउ सामुदायिक सुविधा ले जुड़े काम ला सुरू करवा दे हे।
बता दन कि 1 मई ले सुरू होय प्रदेशव्यापी ‘सुशासन तिहार’ के तहत 4 मई के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ह कबीरधाम जिला के कमराखोल गांव में अचानक चौपाल लगाय रहिन। ए बखत गांव वाले मन ह पीय के पानी के समस्या, मुक्तिधाम में शेड निर्माण अउ पुराना तालाब के गहरीकरण के मांग रखे रहिन। मुख्यमंत्री ह ओखी बखत ये सबो मांग ला पूरा करे के घोषणा कर दे रहिन। अब जिला प्रशासन ह ए घोषणा ला पूरा करे बर काम सुरू करवा दे हे।
कलेक्टर कबीरधाम गोपाल वर्मा ह बताइन कि मुख्यमंत्री जी के घोषणा ऊपर तुरंत कारवाही करत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) कोति ले गांव में पानी के बेवस्था बर नलकूप खने के काम सुरू कर दे गे हे। संग ही, मनरेगा (MGNREGA) ले 12 लाख 15 हजार रूपिया के लागत ले दू ठन काम मंजूर करे गे हे। ये काम ले गांव वाले मन ला रोजगार तो मिलही, संग में पानी बचाए में घलो मदद मिलही। गांव वाले मन के मांग ऊपर गांव में पक्का मुक्तिधाम शेड घलो बनाय जाही। काम ला झटकुन पूरा करे के निर्देश दे गे हे ताकि लोगन मन ला एकर लाभ मिल सके।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अभिषेक अग्रवाल ह जानकारी दीन कि सरकारी पुराना तालाब के गहरीकरण अउ पचरी निर्माण बर 8.48 लाख रूपिया मंजूर करे गे हे, जेमां गांव वाले मन ला 3249 दिन के रोजगार मिलही अउ 6.34 लाख रूपिया मजदूरी के रूप में दिए जाही। वइसने ही, मुक्तिधाम शेड निर्माण में 138 दिन के रोजगार मिलही अउ गांव में एक पक्का संपत्ति तइयार होही।
गांव वाले मन के कहना हे कि पहिली पानी अउ दूसर सुविधा बर ओ मन ला भारी दुख पाए बर परत रहिस। चौपाल में रखे मांग मन ऊपर अतकी तेजी ले काम होय से लोगन मन के भरोसा सरकार ऊपर अउ बढ़ गे हे। गांव के लगभग 130 विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के लोगन मन ला ये काम मन ले सीधा फायदा होही। तालाब के गहरा होय ले पानी बाची अउ काम-काज ले लोगन मन ला अपन गांव में ही रोजी-रोटी मिलही।