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नवा छत्तीसगढ़

धान से आगे बढ़ी छत्तीसगढ़ की खेती, नगदी फसलों ने किसानों की आय को दी नई दिशा

Editor Editor
September 12, 2026 3 Mins Read
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अदरक, फूल, बागवानी और मछली पालन से बढ़े कमाई के विकल्प, आधुनिक मशीनों और तकनीक से खेती का तरीका भी बदल रहा

रायपुर : छत्तीसगढ़ की पहचान भले ही ‘धान के कटोरे’ के रूप में रही हो, लेकिन अब प्रदेश के खेतों में खेती की तस्वीर तेजी से बदल रही है। किसान पारंपरिक धान की खेती के साथ अदरक, फूल, फल-सब्जियां और दूसरी नगदी फसलों का रुख कर रहे हैं। कई किसान खेती के साथ मछली पालन, मुर्गी पालन और बागवानी को जोड़कर अपनी आय के नए रास्ते तैयार कर रहे हैं।

खेती में आधुनिक मशीनों और तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ा है। ड्रोन, ऑटोमैटिक रीपर और दूसरे कृषि उपकरणों ने खेती के काम को आसान किया है। वहीं फार्म मशीनरी बैंक के जरिए छोटे किसानों को महंगी कृषि मशीनें किराये पर उपलब्ध हो रही हैं। इससे खेती की लागत और श्रम दोनों को कम करने में मदद मिल रही है।

खरीफ और रबी उत्पादन में भी बढ़ोतरी

राज्य में पिछले ढाई वर्षों से ज्यादा समय में खेती का रकबा बढ़ने के साथ उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक खरीफ फसलों के उत्पादन में करीब 17 प्रतिशत और रबी फसलों के उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। बेहतर बीज, उर्वरक, सिंचाई सुविधा और कृषि यंत्रीकरण तक किसानों की बढ़ती पहुंच को इसके प्रमुख कारणों में माना जा रहा है।

किसान के खाते में सीधे पहुंच रही सहायता

किसानों को फसल उत्पादन के साथ आर्थिक सुरक्षा देने पर भी जोर दिया जा रहा है। कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ फसल के धान पर आदान सहायता के रूप में 24.73 लाख से अधिक किसानों को 13,289 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

वहीं खरीफ 2023 से 2025 तक योजना के तहत करीब 25.52 लाख किसानों के बैंक खातों में सीधे 35,892.90 करोड़ रुपये की सहायता राशि ट्रांसफर किए जाने का दावा किया गया है। गन्ना प्रोत्साहन योजना के तहत 32,955 किसानों को 64.95 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए फसल बीमा का दायरा भी बढ़ाया गया है। खरीफ सीजन में 15.92 लाख से अधिक और रबी सीजन में 2.99 लाख किसानों को फसल बीमा के दायरे में शामिल किया गया।

धान के साथ दूसरी फसलों पर जोर

छत्तीसगढ़ में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को धान के अलावा दूसरी फसलों की ओर ले जाने की कोशिश की जा रही है। इसके तहत दलहन, तिलहन, मक्का, कपास और मोटे अनाज की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

अरहर, मूंग, उड़द, चना, सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी और तिल जैसी फसलों के साथ कोदो-कुटकी, रागी और बाजरा की खेती करने वाले किसानों को भी प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था है। फसल विविधीकरण के लिए किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ तक प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान है।

खेती में तकनीक और पानी बचाने पर फोकस

कृषि में तकनीक का इस्तेमाल अब गांवों तक पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे कम पानी में सिंचाई की सुविधा मिलने के साथ जल संरक्षण में भी मदद मिलती है।

प्राकृतिक खेती की ओर भी किसानों का रुझान बढ़ा है। पिछले वर्ष 57 हजार से अधिक किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाई, जो खेती को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में बढ़ते कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

बागवानी का बढ़ता दायरा, बाजार से जोड़ना अगली चुनौती

धान के साथ बागवानी भी छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था में अपनी जगह मजबूत कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में राज्य में बागवानी का क्षेत्र 8.42 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है।

फल-सब्जियों और मसालों के अलावा फूल, तेल पाम और बांस जैसी फसलों का क्षेत्र भी बढ़ रहा है। इससे किसानों के पास पारंपरिक फसलों के अलावा कमाई के नए विकल्प तैयार हो रहे हैं। हालांकि अब अगली बड़ी चुनौती इन उत्पादों को बेहतर बाजार, प्रसंस्करण और सही दाम से जोड़ने की है। इसके लिए पैक हाउस और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी सुविधाएं विकसित करने की तैयारी की जा रही है।

खेत से बाजार तक बदल रही तस्वीर

छत्तीसगढ़ में खेती अब सिर्फ धान उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है। नगदी फसलों, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन को खेती से जोड़ने के साथ किसान आय के कई स्रोत तैयार कर रहे हैं। सरकारी योजनाओं, कृषि मशीनरी और आधुनिक सिंचाई तकनीकों की पहुंच बढ़ने से खेती का तरीका भी बदल रहा है।

आने वाले समय में उत्पादन के साथ किसानों को बेहतर बाजार और प्रसंस्करण की सुविधाएं मिलती हैं तो खेत से बाजार तक की यह बदलती तस्वीर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत कर सकती है।

Tags:

Cash CropsChhattisgarh AgricultureCrop DiversificationHorticulture FarmingKisan IncomeModern Farming

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