वनांचल के ‘संजीवनी’ बनिस मोबाइल मेडिकल यूनिट: साढ़े तीन महीना में 2000 ले जादा ग्रामीण के होईस मुफ्त इलाज
- विशेष पिछड़ी जनजाति के दुआर तक पहुंचिस अस्पताल
- पीएम जनमन योजना ले बदली दुर्गम इलाका के तस्वीर
रायपुर. छत्तीसगढ़ के दूर-दराज वनांचल अउ पहाड़ी इलाका में रहइया विशेष पिछड़ी जनजाति बर सरकार के मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) हर एक वरदान साबित होत हे। ‘अस्पताल खुद ग्रामीण के दुआर’ के सोंच ला पूरा करत हुए, ए सेवा ह बीते साढ़े तीन महीना में 2035 मनखे मन ला ओकर मोहल्ला में ही स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाए हे।
पइदल चले के मजबूरी होईस खत्म
पहिली ए इलाका के ग्रामीण ला छोटे-मोटे इलाज बर घलो कतको मील पइदल चलना पड़त रहीस। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत 15 जनवरी 2026 ले शुरू ए यूनिट ह विशेष पिछड़ी जनजाति ‘कमार’ बाहुल्य गांव बल्दाकछार अउ औराई समेत कसडोल क्षेत्र के आन गांव में लगातार कैंप लगावत हे। अब दूर-दराज बस्ती के मनखे मन ला सहर के चक्कर काटे के जरूरत नई रहि गे हे।
एकहे छत के नीचे जांच अउ दवाई
ए चलत-फिरत अस्पताल में सुविधा के पूरा इंतजाम हे। हर एक यूनिट में एक मेडिकल ऑफिसर, लैब टेक्निशियन, नर्स अउ ड्राइवर के होनहार टीम तैनात रहिथे।
- मुफ्त जांच: बीपी, शुगर, मलेरिया अउ हीमोग्लोबिन जइसन जरूरी जांच ओही बखत करे जाथे।
- जानकार डॉक्टर डाहर ले सलाह के साथ-साथ मुफ्त में दवाई घलो बांटे जावत हे।
नियोजित व्यवस्था अउ मुनादी ले सूचना
प्रशासन डाहर ले कैंप लगाए के तारीख अउ जगह एक महीना पहिली ले तय कर लिए जाथे। ग्रामीण मन ला बखत में जानकारी मिले, एखर बर गांव-गांव में मुनादी (ढोल बजाके मुनादी) कराए जाथे। एकर ले ग्रामीण मन में भारी उत्साह देखे बर मिलत हे। स्थानीय ग्रामीण मन कहिन कि अस्पताल में लंबा लाइन अउ आवन-जावन के साधन नई होए के कारण पहिली हमर पूरा दिन बेकार हो जावत रहीस। अब घर के तीर इलाज मिले ले बखत अउ पैसा दोनों के बचत होत हे।
परंपरा ले आधुनिकता कोती बढ़त कदम
ए पहल के सबसे बड़े बढ़िया असर ग्रामीण मन के सोंच में पड़े हे। विशेष पिछड़ी जनजाति के मनखे जेमन पहिली सिरिफ बैगा-गुनिया या पारंपरिक जड़ी-बूटी के भरोसा में रहत रहीन, अब ओमन में आधुनिक इलाज के तरीका बर भरोसा जागे हे। मनखे अब बीमारी ला छुपाए के बदला बखत में जांच अउ इलाज कराए ला पहिली पसंद मानत हें।