दो गायों से शुरू किया डेयरी व्यवसाय, अब हर महीने 25 हजार रुपये की कमाई
रायपुर, छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के ग्राम रेगांवड निवासी रैनू राम सलाम ने मेहनत और सरकारी योजना के सहयोग से आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। दो दुधारू गायों से शुरू किया गया उनका डेयरी व्यवसाय अब चार गायों तक पहुंच गया है। आज वे दूध, दही और पनीर की बिक्री से हर महीने करीब 25 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी सफलता ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन और डेयरी व्यवसाय की संभावनाओं को दर्शाती है।
रैनू राम अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए आजीविका के बेहतर विकल्प तलाश रहे थे। इसी दौरान पशुधन विकास विभाग के माध्यम से उन्हें राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना की जानकारी मिली। योजना के तहत उन्होंने आवेदन किया और दो दुधारू गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए 92,240 रुपये का अनुदान प्राप्त किया। इस आर्थिक सहायता से उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने में मदद मिली।
विभागीय मार्गदर्शन और बेहतर पशुपालन प्रबंधन के जरिए उन्होंने धीरे-धीरे अपने व्यवसाय का विस्तार किया। वर्तमान में उनके पास चार दुधारू गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन लगभग 20 से 25 लीटर दूध का उत्पादन होता है। पशुओं के नियमित टीकाकरण, पौष्टिक हरे चारे और नस्ल सुधार जैसी सुविधाओं पर ध्यान देने से दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली है।
रैनू राम ने अपनी आय बढ़ाने के लिए केवल दूध की बिक्री तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने दूध से दही और पनीर बनाकर बेचने की शुरुआत की, जिससे उन्हें स्थानीय बाजार में अतिरिक्त अवसर मिले। इस तरह उन्होंने अपने डेयरी व्यवसाय में मूल्य संवर्धन को भी शामिल किया। उनके इन प्रयासों का परिणाम है कि उनकी मासिक आय पहले के लगभग 10 हजार रुपये से बढ़कर अब 25 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
आय में इस वृद्धि से रैनू राम के परिवार को आर्थिक मजबूती मिली है और जीवन स्तर में सुधार हुआ है। वे अपनी सफलता का श्रेय छत्तीसगढ़ शासन, पशुधन विकास विभाग और जिला प्रशासन नारायणपुर के सहयोग को देते हैं। उनके अनुसार, सही मार्गदर्शन और योजनाओं का लाभ लेकर ग्रामीण परिवार भी पशुपालन को आय का स्थायी साधन बना सकते हैं।
नारायणपुर जिले में डेयरी व्यवसाय के माध्यम से रैनू राम सलाम की यह सफलता ग्रामीण आजीविका और स्वरोजगार की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण है। पशुपालन और दूध से बनने वाले उत्पादों की बिक्री के जरिए किसान अपनी आय के नए स्रोत विकसित कर सकते हैं। ऐसी पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और परिवारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।