राज्योत्सव में वन विभाग की प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र, पौधरोपण से रोजगार तक की दिखी तस्वीर
बांस शिल्प, वनोपज और हर्बल उत्पादों के जरिए दिखाई गई वन संरक्षण की पहल, मंत्री केदार कश्यप ने किया स्टॉल का निरीक्षण
रायपुर, नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव-2026 में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहां वन और वन्यजीव संरक्षण के साथ आदिवासी संस्कृति, ग्रामीण आजीविका और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की पहल को प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी में पौधरोपण अभियान, बांस से बने शिल्प, वनोपज से तैयार उत्पाद और हर्बल वस्तुओं के जरिए छत्तीसगढ़ के वन आधारित जीवन और रोजगार के अवसरों की झलक देखने को मिल रही है।
राज्योत्सव के दूसरे दिन वन मंत्री केदार कश्यप ने विभागीय स्टॉल का निरीक्षण किया। उन्होंने वन धन विकास केंद्रों से जुड़े समिति सदस्यों से वनोपज के संग्रहण, प्रसंस्करण और उत्पाद निर्माण की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने वनोपज से तैयार औषधियों के बारे में जाना और कोदो से बने बिस्कुट का स्वाद भी चखा। मंत्री ने आत्मसमर्पित महिलाओं से भी बातचीत की, जो अब वन धन विकास केंद्रों से जुड़कर आजीविका के कामों में सक्रिय हैं।
प्रदर्शनी का मुख्य द्वार इंद्रावती टाइगर रिजर्व के प्रसिद्ध ‘चेंदरू द्वार’ की तर्ज पर बनाया गया है। इसमें बस्तर के आदिवासी युवक चेंदरू और बाघ की मित्रता को दर्शाया गया है, जो मानव और वन्यजीवों के सह-अस्तित्व का संदेश देता है। वहीं, ‘संवरता छत्तीसगढ़’ थीम के तहत ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की उपलब्धियां भी प्रदर्शित की गई हैं। विभाग के अनुसार, वर्ष 2024 में 3.50 करोड़ और 2025 में 3.55 करोड़ पौधे लगाए गए। किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत 36,896 किसानों ने अपनी 62,441 एकड़ निजी भूमि पर 3.67 करोड़ पौधे रोपे हैं।
‘बदलता बस्तर’ पैनल में क्षेत्र में हो रहे विकास और आजीविका से जुड़े प्रयासों को दिखाया गया है। इसके तहत 572 देवगुड़ियों का निर्माण और जीर्णोद्धार किया गया है, जबकि मनरेगा के माध्यम से 21.67 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ है। कांगेर वैली क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 35 जिप्सियों का संचालन किया जा रहा है, जिससे करीब 200 स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है।
संयुक्त वन प्रबंधन एवं रोजगार स्टॉल पर बांस से बने घर, नाव, मछली, लालटेन, मंदिर, फूलदान और सजावटी वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। वहीं, वन धन केंद्रों में तैयार शहद, आंवला और अन्य वनोपज आधारित उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। औषधीय पादप बोर्ड की ‘घर की बाड़ी में औषधीय पौधों का रोपण’ योजना के जरिए ग्रामीण महिलाओं को आय से जोड़ने की जानकारी भी दी जा रही है। बोर्ड के अनुसार, सिंगी और सतावर जैसे पौधों की खेती से महिलाएं सालाना 20 से 30 हजार रुपये तक कमा सकती हैं। धमतरी जिले के 27 गांवों में पायलट परियोजना के तहत 1.21 लाख पौधे लगाए गए हैं।
छत्तीसगढ़ हर्बल्स स्टॉल पर सफेद मूसली, त्रिफला और आंवलकी चूर्ण के साथ एलोवेरा शैम्पू, महाभृंगराज तेल और एलोवेरा साबुन जैसे उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। कांगेर घाटी, तीरथगढ़ जलप्रपात और ग्रामीण तालाब के मॉडल भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। प्रदर्शनी देखने पहुंचे ग्राम मरोद के त्रिवेंद्र साहू और रवि निर्मलकर ने कहा कि यहां एक ही जगह छत्तीसगढ़ के जंगलों की खूबियों, बांस शिल्प और औषधीय पौधों की जानकारी मिल रही है। उन्होंने वन संरक्षण के साथ ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने की पहल को उपयोगी बताया।