अमृत सरोवर बना महिलाओं की आजीविका का आधार, मछली पालन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम
रायपुर, सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड की ग्राम पंचायत बिरीमकेला में बना अमृत सरोवर अब जल संरक्षण के साथ ग्रामीण महिलाओं की आजीविका का साधन भी बन रहा है। यहां ज्योति स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने सरोवर में मछली पालन शुरू कर आय का नया जरिया तैयार किया है।
पहले किसी आयमूलक गतिविधि से नहीं जुड़ी समूह की महिलाओं ने स्थानीय जल संसाधन का उपयोग करते हुए सामूहिक रूप से मछली पालन शुरू किया। पहली बार मछलियों की बिक्री से हुई आमदनी ने महिलाओं का उत्साह बढ़ाया और अब उन्होंने दोबारा सरोवर में मछली पालन शुरू कर दिया है।
पहली बिक्री से बढ़ा महिलाओं का हौसला
समूह की सदस्य रजनी चौहान के अनुसार, अमृत सरोवर में पहली बार मछली पालन शुरू करने के बाद तैयार हुई मछलियों में से करीब 15 किलो मछली की बिक्री की गई। इससे समूह को पहली बार इस गतिविधि से आमदनी हुई।
पहली बिक्री से मिली आय ने महिलाओं को मछली पालन को आगे भी जारी रखने के लिए प्रेरित किया। अब समूह इसे नियमित आजीविका के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।
दोबारा डाली गईं मछलियां
रजनी चौहान ने बताया कि समूह ने दोबारा अमृत सरोवर में मछलियां डाली हैं। इस बार 10 पैकेट मछलियां डाली गई हैं। समूह की महिलाएं मिलकर इसकी देखरेख कर रही हैं और आने वाले समय में इससे आय बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि अमृत सरोवर से जुड़ने से पहले समूह के पास कोई आयमूलक गतिविधि नहीं थी। अब गांव में ही उपलब्ध जल संसाधन के माध्यम से महिलाओं को काम और आमदनी का अवसर मिला है।
रजनी चौहान ने कहा, “पहले हम लोग समूह में कुछ नहीं करते थे। अब अमृत सरोवर मिला है, जिसमें मछली पालन कर रहे हैं और हमारी आजीविका बढ़ रही है। आगे भी हम लोग आजीविका बढ़ाएंगे और अपने पैरों पर खड़े होंगे।”
अमृत सरोवर से जुड़ी यह पहल बताती है कि जल संरक्षण के लिए तैयार की गई ग्रामीण संरचनाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़कर महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर तैयार किए जा सकते हैं। ज्योति स्व-सहायता समूह की महिलाएं अब मछली पालन को आगे बढ़ाकर अपनी आमदनी मजबूत करने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।