आजीविका डबरी ने बदली प्रभु लाल की खेती, सिंचाई के साथ मछली पालन से बढ़ी कमाई
धमतरी, पानी की समस्या से जूझ रहे धमतरी के किसान प्रभु लाल के लिए खेत में बनी आजीविका डबरी अब कमाई और सिंचाई दोनों का सहारा बन गई है। मगरलोड विकासखंड के ग्राम पंचायत पठार के आश्रित गांव बेन्द्राचुवा में रहने वाले प्रभु लाल करीब 2.5 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं। पहले उनकी खेती काफी हद तक बारिश पर निर्भर थी, लेकिन डबरी बनने के बाद खेत को सिंचाई के लिए पानी मिलने लगा है।
वर्ष 2025-26 में प्रभु लाल के खेत में वीबी-जी रामजी योजना के तहत आजीविका डबरी निर्माण की स्वीकृति मिली। इसके लिए 2.55 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई थी, जिसमें 2.24 लाख रुपये खर्च हुए। डबरी में बारिश का पानी जमा होने से अब फसल के जरूरत वाले समय में खेत को पानी मिल जाता है।
सिंचाई की सुविधा मिलने से प्रभु लाल की फसल के उत्पादन और गुणवत्ता में भी सुधार हुआ। उन्होंने डबरी का इस्तेमाल केवल खेत की सिंचाई के लिए करने के बजाय इसमें 5 किलो मछली बीज डालकर मछली पालन भी शुरू कर दिया। इससे पहले ही साल उन्हें करीब 5 हजार रुपये की अतिरिक्त आय हुई।
प्रभु लाल बताते हैं कि डबरी बनने के बाद खेत में पानी को लेकर चिंता काफी कम हो गई है। एक ही जलस्रोत से खेती के लिए सिंचाई का इंतजाम होने के साथ मछली पालन से अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है। इससे घरेलू जरूरतों को पूरा करने में भी उन्हें मदद मिल रही है।
बेन्द्राचुवा की यह कहानी बताती है कि बारिश के पानी का बेहतर तरीके से संचयन खेती के साथ अतिरिक्त आजीविका का जरिया भी बन सकता है। जल संरक्षण, सिंचाई और मछली पालन को जोड़कर प्रभु लाल ने अपनी छोटी सी डबरी को आय के एक अतिरिक्त साधन में बदल दिया है।